दीपक पारेख HDFC: विदेशी नौकरी छोड़ संभाला चाचा का कारोबार, पूरा किया भारत के ‘अपने घर’ का सपना पढ़िए

HDFC  के ग्रुप के चेयरमैन दीपक पारेख ने इस्तीपा दे दिया। शुक्रवार में हुए बैठक में HDFC  बैंक चेयरमैन दीपक पारेख ने इस्तीपा दे दिया।

उनका सफर इस कंपनी में बहुत ही बढ़िया हे। उन्होंने कहा अब मेरा सन्यास लेने का टाइम आ गया हे। वो बोलते हे की ये मेरे फ्यूचर की उम्मीद और आशाऔ के साथ अलविदा कहने का समय हे। 

Deepak Parekh रिटायरमेंट HDFC
Deepak Parekh रिटायरमेंट HDFC

तो चलिए हम उनके सफर के बारे में जानते हे।

HDFC बैंक के चेयरमैन दीपक पारेख इनकी विदाई बैंक के विलय से पहले हो गयी। दीपक पारेख के चाचा एच टी पारेख ने १९७७ में की थी। और चाचा के कहने पे दीपक पारेख भी इस कंपनी में १९७८ में काम करने लगे।

और दीपक पारेख मेहनत और लगत से आज HDFC ग्रुप १४ लाख करोड़ का हो चूका हे। तो उनके चाचा के कोई भी बचे नहीं थे तो दीपक पारेख को ही अपना बेटा मानते थे।

लोगोंको घर खरीदने के लिए लोन देने वाली HDFC पहेली कंपनी थी। ये कंपनी आज ९० लाख से ज्यादा लोगोंको अपने घर के सपने पुरे करने मदद क्र चुकी हे।

तो दीपक पारेख अछि खासी विदेश में जॉब कर रहे थे किन्तु चाचा के कहने पर उन्होंने वो जॉब छोड़कर HDFC को ज्वाइन किया। परिवार के खाते उन्होंने विदेश की नौकरी छोड़कर HDFC  में ज्वाइन किया। 

HDFC में ज्वाइन किया एम्प्लॉय की तरह और अपना नाम रोशन किया

१९७८ में चाचा के कहने पर दीपक पारेख ने एम्प्लॉय की तौर पर ज्वाइन किया HDFC कंपनी को। किन्तु जैसे उन्होंने कंपनी काम किया वो लाजवाब था उन्होंने उस कंपनी में इंटरप्रेन्योर की तरह उस कंपनी में काम किया। मुंबई एक छोटे से चॉल में रहते थे। और उनके चाचा का सपना था की इंडिया हर एक के पास अपना खुद का घर हो। तो इस चाचा के सपने दीपक पारेख ने साकार किया।
तो उनकी पढ़ाई मुंबई में हुए। मुंबई के सेंट जेवियर हाई स्कूल और सीडेनहम कॉलेज से उनकी पढ़ाई हुए हे। वो चार्टेड अकाउंट भी बन चुके हे। और अर्नेस्ट एंड यंग जैसी कंपनी में काम किया हे।

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